TRUST

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RANGARH JEE
धीरेंद्र सिंह रांगड़

रेगिस्तान
की सूखी धरा पर
आसमान को ताकता
एक मात्र हरा पेड़….
खड़ा है

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पपीहे की
भांति
पानी की
आस में…..
उसकी जड़ें
धरा की अनंत
गहराइयों में
समा चुकी हैं
पानी की तलाश में….
काले बादल
आते हैं
लेकिन
वो निर्दयी हवा
उन्हें दूर
उड़ा कर
ले जाती है….
उसे दया भी
नहीं आती
उन छोटे नन्हें
सैकड़ों पौधों पर
जो धीरे- धीरे
सूख कर
मिट्टी हो
रहे हैं…..
सैकड़ों बरसों से
सूखी रेतीली धरा पर
ये वृक्ष खड़ा है
दृढ़ इच्छा शक्ति
और
विश्वास से…..
कि एक रोज
ये काले बादल
बरसेंगे और
मिटेगी उसकी
बरसों की प्यास
और
पूर्व की भांति
पनपेंगे उसके
नीचे भी हरे-भरे
नन्हें- नन्हें पौधे
एक दिन…..

धीरेंद्र सिंह रांगड़,लेखक सामाजिक विषयों पर कई काव्य रचनाएं और लघु कथाएं लिख चुके हैं।

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