उत्तराखंड में पानी की बर्बादी पर बड़ी कार्रवाई

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  • नैनीताल में दो फार्महाउस मालिकों सहित सात लोगों के खिलाफ मुकदमे के आदेश
  • अवैध कनेक्शनों पर मोटर लगाकर बागीचों को सींचा जा रहा था
  • फार्महाउस पर मिली अवैध बोरिंग, केयर टेकर पर भी होगा मुकदमा
  • अवैध रूप से कनेक्शन देने पर दो लाइनमैनों को नौकरी से हटाया
नैनीताल।नैनीताल में पानी की बर्बादी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने दिल्ली निवासी दो फार्म हाउस मालिकों सहित सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी ने रीची क्षेत्र के इन दोनों फार्म हाउसों का निरीक्षण किया, जहां पानी के अवैध कनेक्शनों में मोटर लगाकर बागीचों को सींचा जा रहा था। डीएम ने क्षेत्र के लाइनमैनों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने और इनको नौकरी से हटाने के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि पानी की बर्बादी पर उत्तराखंड में पहली बार मुकदमे दर्ज कराने जैसी बड़ी कार्रवाई की गई।
गर्मी में एक ओर जहां क्षेत्रों में पेयजल के लिए लोगों को मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं,वहीं बेतालघाट के दूरस्थ क्षेत्र रीची में दिल्ली निवासी अरविन्द सिंघल, शालिनी सिंघल और कपिल बख्स, मीनाक्षी बख्स अपने फार्म हाउसों में पीने के पानी से उद्यान और बागवानी की सिंचाई की जा रही थी। जिलाधिकारी दीपक रावत ने रीची क्षेत्र स्थित इन दोनों फार्म हाउसों का निरीक्षण किया। मौके पर पाया कि दिल्ली निवासी कपिल बख्स, मीनाक्षी बख्स और अरविन्द सिंघल, शालिनी सिंघल ने पानी का अवैध संयोजन लिया है और मोटर लगाकर बागीचों की सींचा जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार सिंघल परिवार ने अवैध बोरिंग भी कराई है, जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए दोनों परिवारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए।
 जिलाधिकारी ने अवैध रूप से पेयजल संयोजन देने वाले लाइनमैन शेखर राम और हरीश चन्द्र पलड़िया के खिलाफ भी मुकदमा लिखाने तथा उनको नौकरी से तत्काल हटाने के आदेश दिए।  साथ ही गलत जानकारियां देने वाले सिंघल फार्म के केयरटेकर महेन्द्र सिंह नेगी की भी एफआईआर करने के निर्देश तहसीलदार और पटवारी को दिए गए।
दस्तावेजों में नहीं दिखा पाए फार्महाउस की भूमि 
नैनीताल। जिलाधिकारी ने पटवारी को मौके पर फार्म हाउस मालिक बताए जा रहे अरविन्द सिंघल, शालिनी सिंघल की लगभग 35 एकड़ भमि की खसरा-खतौनी दिखाने को कहा। लेकिन पटवारी खसरा-खतौनी में सिंघल की भूमि ही नहीं दिखा पाए। इस पर जिलाधिकारी ने 24 घंटे में भूमि की नाप-जोख कर खसरा-खतौनी में दर्ज सिंघल पारिवार व कपिल बख्स की वास्तविक भूमि नापकर दिखाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने सिंघल और बख्स को भूमि के मूल कागजात भी दिखाने के साथ ही बोरिंग की स्वीकृति भी 24 घंटे के भीतर दिखाने के निर्देश दिए। इस दौरान उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार, तहसीलदार औरप पटवारी भी उपस्थित रहे।
बागीचों में बर्बाद किया गांव को नहीं दिया पानी
नियमानुसार ग्रामीण इलाके में बोरिंग कराने पर आसपास के लोगों को पानी दिया जाना चाहिए।तीन दिन पहले जिलाधिकारी के संज्ञान में यह मामला आया था और उन्होंने बोरिंग करने वालों को गांव में आसपास रह रहे परिवारों को भी पानी देने को कहा था, लेकिन एेसा नहीं किया गया। पीने के पानी से बागीचों को सींचा जाता रहा।

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