घाटों पर बायो टॉयलेट्स की व्यवस्था करेंः सीएम

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बायो टॉयलेट से ही प्रदुषण मुक्त होगी गंगा
मुख्यमंत्री ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट की बैठक ली
देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनाए जा रहे घाटों और श्मशान घाटों की विस्तार से जानकारी ली।
सीएम आवास स्थित कैम्प कार्यालय में बुलाई बैठक में मुख्यमंत्री रावत ने प्रोजेक्ट की कार्यदायी संस्थाओंं वाप्कोस (WAPCOS) और सिंचाई विभाग को मुख्यमंत्री रावत ने निर्देश दिए कि घाटों में सीवेज ट्रीटमेंट, बायो-टाॅयलेट्स, चेंजिंग रूम आदि की सुदृढ़ व्यवस्था की जाए। घाटों के सौन्दर्यीकरण के लिए हैरीटेज लुक का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि घाटों में पानी की व्यवस्था के लिए सोलर पम्प को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत बनाए जाने वाले घाटों में कनखल एवं खड़खड़ी घाटों सहित उत्तरकाशी में मातली के नजदीक चुंगी बड़ेथी को भी इसमें शामिल किया जाए।
बायो टॉयलेट का रेखाचित्र एवं फ्लो चार्ट – बंका बायो लू . / आगाज .
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्मशान घाटों में ऐसे शवदाह गृहों का निर्माण किया जाए, जिसमें कम लकड़ी का प्रयोग होता हो। हमें नमामि गंगे के साथ-साथ पर्यावरण का भी ख्याल रखना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे श्मशान घाटों, जहां लोगों को लकड़ी की समस्या होती है, में वुड स्टोर की व्यवस्था की जाए। साथ ही जनमानस की आस्था का पूरा ख्याल रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि घाटों में सीवेज ट्रीटमेंट का विशेष ख्याल रखा जाए। इस प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, मदन कौशिक, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी आदि उपस्थित थे।

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