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Dehra Dun
Thursday, September 24, 2020

Blog Live

अपनी तनख्वाह बढ़वाने के लिए दूसरों का पैसा रुकवाने पर पूरा जोर

देहरादून में कुछ दिन बिताने के बाद मुझे फिर से फोन करके धर्मशाला आने के...

इनकी सुनते रहो, काम करते रहो, पैसे की बात मत करना 

अपने नंबर बढ़ाने के लिए दूसरों को दिक्कतों में डालने वाले बहुत हैं पत्रकारिता में अखबार...

यह बच्चा तो बातों की ‘खिचड़ी’ बनाने में माहिर है  

बचपन की बातें पिछली बार, जो बचपन की बातें आपके साथ साझा की थीं, क्या फिर...

अखबारों में युवाओं से पहाड़ तुड़वाने वाले, उनकी दिक्कतों पर हो जाते मौन

आपको बता रहा था कि अप्रैल 1999 की रात दो बजे मंडी के बस स्टैंड...

अखबार में कोई किसी का नहीं होता, मत करो किसी की परिक्रमा

अखबार में काम करने के शुरुआती वर्षों में, मैं हमेशा यही समझता था कि यहां...

अखबारों में खबरों का संपादन और रिपोर्टिंग

अखबारों की बात हो रही है तो संपादन और रिपोर्टिंग पर चर्चा करना भी जरूरी...

हथेली पर आम उगाने की मशीन नहीं है रिपोर्टर

आप रिपोर्टर हैं सुपरमैन नहीं। पर, संपादक से लेकर डेस्क तक के कुछ साथियों की...

अखबार के लिए महत्वपूर्ण होती है डेस्क और रिपोर्टर्स में खींचतान

अखबारों में डेस्क और रिपोर्टिंग वालों के बीच बहसबाजी होती रहती है। हालांकि अखबारों में...

पत्रकारिता तो अनुभवों से आती है…

एक युवा बहुत सारे सपने लेकर पत्रकारिता में आता है। उससे पूछो, तुम पत्रकारिता में...

पत्रकारिता न तो परिक्रमा है और न ही इसका कोई दायरा है

आज चार साल बाद भी कुछ लोग मुझसे पूछते हैं, तुमने पत्रकारिता क्यों छोड़ी। मेरा...
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मेरा पड़ोसी आम का पेड़

मेरे घर के पीछे आम का पेड़ है। न तो उसने कभी मुझसे बात की...

मेरा कमरा

कमरा निर्जीव है और मैं सजीव, क्योंकि विज्ञान ऐसा कहता है। माफ करना! मैं यहां...

जर्नलिज्म का रियल टाइम-2

1997 में मेरठ वाले अखबार देहरादून से प्रकाशित होने लगे। अब तो देर रात तक...

जर्नलिज्म का रियल टाइम-1

टेक्नोलॉजी के बिना जर्नलिज्म नहीं हो सकती। टेक्नोल़ॉजी ने दूसरे दिन का इंतजार कराने वाली...

गन्ने से सुनिये, जिंदगी की कहानी

राजीव सिंघल लगभग निर्जीव हो चुका हूं। अब तो शरीर ने भी मेरा साथ छोड़...

गेहूं की आत्मकथा

राजीव सिंघल उस रात, मैं धरती से बाहर आया था। हां भाई हां, उसे धरती...

अपशब्दों में भी होती भला करने वाली ताकत

शब्दों में गजब की ताकत है, भले ही वो किसी काे तिरस्कृत करने के लिए...

दशहरा मेला लाइवः रावण के पुतले की लकड़ी

मैं अपने बेटे के साथ दशहरा मेला देखने गया। बाइक कहां खड़ी करेंगे, इस सवाल...

नेताजी का इंटरव्यू

पड़ोस का कल्लन अब बड़ा आदमी हो गया। मुझे याद है पांचवीं के पेपरों में...

मास्टर जी की छड़ी

पांचवी क्लास की पिटाई अब तक नहीं भूला। कभी राइटिंग खराब होने के नाम पर...

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