छोटी सी कहानी और बड़ी सीखः स्वयं को बदलो

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किसी जमाने में एक राजा था, जो प्रजा के हित के लिए कार्य करता था। एक दिन उसने अपने दरबारियों के साथ राज्य का पैदल ही भ्रमण करने का निर्णय लिया। सुबह से देर शाम तक राजा पैदल चला और जनता से मुलाकात की। महल में वापस लौटने पर राजा के पैरों में काफी दर्द होने लगा, क्योंकि राजा को पैदल चलने की आदत नहीं थी।

राजा के एक दरबारी ने सुझाव दिया, महाराज राज्य की सड़कें ठीक नहीं है। इनको बदलना पड़ेगा। राजा ने निर्णय लिया, क्यों न चमड़े की सड़कें बनाई जाएं, जिन पर बिना तकलीफ चला जा सकेगा। सड़कों के लिए बड़ी मात्रा में चमड़ा चाहिए था। वहीं राज्य का काफी धन इस परियोजना पर खर्च होता। राजा अभी इन सभी खर्चों का हिसाब लगा रहा था कि एक व्यक्ति ने सुझाव दिया कि महाराज सड़कों को बदलने से अच्छा है कि हम स्वयं में क्यों न बदलाव करें। राजा ने कहा, आपकी बात का मतलब नहीं समझा, कृपया करके विस्तार से बताएं। जरूर पढ़ें- चीन की कहानीःराजा की बिल्ली का नामकरण

उस व्यक्ति ने कहा, महाराज क्यों न सभी लोग पैरों में चमड़ा पहनकर चलें, इससे सभी आसानी से सड़कों पर चल सकेंगे। राजा को यह आइडिया क्लिक कर गया और फिर पैरों में पहने जाने वाले चमड़े ने जूतों का रूप ले लिया। यह कहानी संदेश देती है कि दुनिया को बदलने की जगह स्वयं में बदलाव की पहल होगी, तो कुछ भी बदलने की जरूरत नहीं है।

 

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