गाय देगी एड्स पीड़ित व्यक्ति को जीवनदान

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टेक्सास


अमेरिका में किए एक अध्ययन में सामने आया है कि गाय की मदद से ऐसी वैक्सीन विकसित की जा सकती है, जिससे एड्स पीड़ित व्यक्ति को जीवनदान दिया जा सकता है| चिकित्सा वैज्ञानिक इस अध्ययन के बाद एड्स के उपचार को लेकर काफी आशान्वित हो गए हैं, क्योंकि इस जानलेवा बीमारी का अब तक कोई उपचार नहीं खोजा जा सका है| भारतीय सनातन धर्म परंपरा में गाय को बेहद उपयोगी बताते हुए इसके दूध, गोमूत्र और गोबर को कई रोगों के निदान में कारगर बताया गया है|
अमेरिकी जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गाय की एंटीबाडीज यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता से एड्स के वायरस एचआईवी के असर को 42 दिन में 20 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने चार गायों को प्रयोग के लिए चुना और उन्हें एचआईवी के दो-दो इंजेक्शन लगाए। एक महीने बाद उनमें प्रतिरक्षी कोशिकाएं विकसित होने लगीं। अध्ययन में कहा गया कि 381 दिन में ये एंटीबॉडीज एचआईवी के असर को 96 फीसदी तक खत्म कर सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जटिल और बैक्टीरिया युक्त पाचन तंत्र की वजह से गायों में प्रतिरक्षा क्षमता ज्यादा विकसित होती है। अमेरिका के नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने इस जानकारी को काफी उपयोगी बताया है।
गौरतलब है कि एड्स के कारण मनुष्य के शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता घटने लगती है। इसका इलाज अब तक नहीं ढूंढा जा सका है। वैज्ञानिक इस दिशा में काफी समय से प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन इस रोग पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में उन्हें अब तक सफलता नहीं मिली है| हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है कि गाय की मदद से एक वैक्सीन बनाई जा सकती है, जिसकी मदद से पीड़ित व्यक्ति को एचआईवी के पहले स्टेज से ही बचाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि कुछ जरूरी एंटीबॉडीज गायों में कुछ सप्ताह में ही बनने लगते हैं, लेकिन मनुष्य में ऐसे एंटीबॉडीज बनने में काफी समय लगता है। उन्होंने कहा कि गाय की प्रतिरोधक क्षमता खास तरह की है|
उल्लेखनीय है कि वेद और पुराणों में गाय के दूध, गोमूत्र और गोबर को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए इसे कई समस्याओं के निदान में कारगर माना गया है। इसी तरह गाय के दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर से बने पंचगव्य को भी अनेक बीमारियों की रोकथाम में कारगर माना जाता है। पंचगव्य से होने वाले फायदे और इस दिशा में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया है। गोमूत्र से कैंसर के उपचार की दिशा में भी अध्ययन किया जा रहा है|

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