आगाज के संस्थापक जेपी मैठाणी को दधिचि पुरस्कार

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चमोली जिले के पीपलकोटी में आगाज फैडरेशन ने बनाया बायोटूरिज्म पार्क

देहरादून। पीपलकोटी नौरख के सामाजिक कार्यकर्ता और वर्तमान में आगाज फेडरेशन संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष जेपी  मैठाणी को प्लस एप्रोच फाउंडेशन ( स्पंदन) और सीएसआर टाइम्स ने दधिचि पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। जेपी मैठाणी को 16 सितम्बर को दिल्ली के लोधी रोड स्थित स्कोप काम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में पूर्व क्रिकेटर कपिल देव सम्मानित करेंगे।

बीस साल से सामाजिक कार्यों और नए प्रयोगों के साथ ग्रामीणों के विकास के लिए कार्य कर रहे जेपी मैठाणी को सम्मानित पुरस्कार की घोषणा पर उनके प्रशंसकों और ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। मैठाणी ने सामाजिक सरोकारों, पत्रकारिता, ग्रामीण विकास, शराब विरोधी आन्दोलन और सोशियल आर्मी का गठन कर युवाओं को एकजुट करने की दिशा में अहम कार्य किए।

पहाड़ में इको टूरिज्म को प्रोत्साहन , स्थानीय हस्तशिल्प – रिंगाल के उत्पाद, डांस कंडाली और भांग के रेशों से कपड़ा बनाने सहित कई कार्यों के जरिये स्वरोजगार की राह तैयार की, जिसका बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला। रिंगाल हस्तशिल्प के 19 मास्टर प्रशिक्षकों को आगे बढ़ाया गया। हाल ही में भारत से बर्मिंघम गए हस्तशिल्पियों में पूर्व में आगाज की ओर से प्रशिक्षित उर्गम के धरमलाल भी शामिल थे। इस समूह को यूएचएचडीसी ने बर्मिंघम भेजा था।

जेपी मैठाणी ने चमोली के दशोली ब्लाक में महिला संगठनों और सोशियल आर्मी के साथ 1999 में सबसे बड़ा शराब विरोधी आन्दोलन चलाया।  शराब माफिया के षड्यंत्र का शिकार होकर जेपी मैठाणी को  वर्ष 2004 में 22 दिन जेल में भी रहना पड़ा और बाद में न्यायालय ने उनको बाइज्जत बरी किया।

मैठाणी बताते हैं कि आगाज संस्था ने प्रदेश का पहला बायोटूरिज्म पार्क पीपलकोटी में स्थापित किया है। चार नये ट्रैकिंग रूट विकसित किए गए हैं। हर साल ग्रेट हिमालयन ट्रैक का आयोजन किया जाता है। रिंगाल की प्रसाद टोकरी, रिंगाल के 200 से अधिक डिजाइन आईआईसीडी, एनआईडी, सिम्बोसिस पुणे के साथ मिलकर तैयार किेए।

उन्होंने बताया कि डीआरडीए, एसजीएसवाई और आजीविका परियोजना के तहत जनपद चमोली के 400 से अधिक हस्तशिल्पियों को पीपलकोटी में बायोटूरिज्म पार्क में प्रशिक्षित किया। पीपलकोटी में उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद तथा यूएनडीपी, जीईएफ, एसजीपी के सहयोग से आजीविका वाटिका और बायोटूरिज्म पार्क की स्थापना 2001 में की।

जेपी मैठाणी

आगाज के अध्यक्ष जेपी मैठाणी के अनुसार वन विभाग के शरद सिंह कंडारी के साथ वनाग्नि नियंत्रण के कार्य किए। 2013 की आपदा के बाद – सुनाली , उर्गम घाटी, तेफना और बांतोली में आपदा प्रभावित36 परिवारों के लिए मिड टर्म शेल्टर बनाए। गोविन्द घाट में 942 घोड़े खच्चरों, जो अलकनंदा नदी के दूसरी ओर फंस गए थे, उनके रेस्क्यू और पुनर्वास की दिशा में पीएफए देहरादून के साथ मिलकर कार्य किया।

जल आन्दोलन, गाँव बचाओ आन्दोलन, हिमालय दिवस आयोजन में संस्था की भागीदारी रही है। उन्होंने बताया कि संस्था को 2005 में वाशिंगटन वर्ल्ड बैंक के रिकग्निशन पुरस्कार,  2012 में सीताराम राव केस स्टडी कम्पटीशन, 2014 में आपदा में सहयोग के लिए राज्य सरकार का पुरस्कार हासिल हो चुका है। यह संस्था को मिलने वाला चौथा पुरस्कार है।

 

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