डुग डुगी जुलाई 2020

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यह भी एक दौर है। वह भी एक दौर था जब बच्चे दौड़ते थे, उनके हिस्से में बड़े-बड़े आंगन होते थे। दादा दादी, नाना नानी की किस्से कहानियां होती थी। मां के पास भी वक्त था कि वह बच्चे को सुलाते हुए कोई लोरी गाए या कोई परी कथा सुनाए।

DUG DUGI JUNE 2020 

DUG DUGI JULY 2020
अफसोस है कि आज उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं…! हम लगातार उसको इस बात का एहसास करा रहे हैं कि समय दौड़ रहा है और वह जैसे स्थिर है। उसमें बचपन गुमशुदा है, वह गुमसुम सा है।
बस्ते का बोझ उसकी कमर को सीधा ही नहीं होने देता। वह बेचारा क्या करें ? आंखों पर चश्मा चढ़ा है, पढ़ाई के दबाव में बच्चा दबा पड़ा है। दरअसल हम बहुत जल्दी उसको बड़ा बना देना चाहते हैं। समय से भी आगे उसको बड़ा देखना चाहते हैं। लेकिन इस बीच उसका बचपन रोज खोता जा रहा है।
आओ कुछ ऐसा करें कि उसका बचपन उसको लौटा दें एक खिलख़िलाहट उसके चेहरे पर हो, उसके ओठों पर हंसी तैरती हो। बच्चा बच्चा लगे ,मासूम सा प्यारा सा…।
DUG DUGI JULY 2020

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