गायक बनने के लिए गधे ने टिड्डी से सलाह ली

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किसी जंगल के पास एक गधा रहता था। वह अपनी बेसुरी आवाज से बहुत परेशान था। वह भी चाहता था कि उसकी आवाज किसी गायक की तरह हो। वह भी सुरों में गीत गाना चाहता था। एक दिन वह हरी घास के मैदान में चर रहा था कि उसे मधुर गीत सुनाई दिया।

घास से भरे मैदान में काफी तलाश के बाद गधे ने एक टिड्डी को गाते हुए देखा। गधे ने टिड्डी को डिस्टर्ब किए बिना गीत का आनंद लिया। गीत समाप्त होने पर उसने टिड्डी से पूछा, दोस्त मैं भी यही हरी घास खाता हूं, जो शायद तुम भी खाते होगे। मैं भी तुम्हारी तरह गाना चाहता हूं। मुझे बताने का कष्ट करोगे कि तुम और क्या खाते हो।

टिड्डी ने सोचा कि गधा उससे मजाक कर रहा था, इसलिए उसने भी मजाक में जवाब दिया कि वह हरी घास पर जमा ओंस की बूंदों का सेवन करता है। ओंस से उसकी आवाज में स्वयं सुर आ जाते हैं। गधे ने टिड्डी का धन्यवाद किया और तय कर लिया कि आज से ओंस वाली घास ही चरेगा। उसने देखा कि सुबह-सुबह घास पर ओंस जमा होती है, इसलिए तड़के ही घास चरी जाए।

गधा सुबह-सुबह मैदान में पहुंच जाता और ओंस वाली घास चरता। कई माह बाद भी उसकी आवाज तो पहले जैसी ही थी। वह कभी भी सुर में गीत नहीं गा पाया, लेकिन सुबह-सुबह घास के मैदान में सैर करने और चरने से उसकी सेहत अच्छी हो गई। वह उस टिड्डी को तलाश करता रहा, जिसने उसे बताया था कि ओंस का सेवन करने से आवाज अच्छी हो जाती है।

 

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