रंगकर्मी , लोकगायक गायक पहाड़ से मौल्यार ले के पहुंचे घंटाघर

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  • मनोज इष्टवाल की रिपोर्ट
मनोज इष्टवाल,वरिष्ठ पत्रकार

अपने समाज की धडकनों में रची बसी सौंधी खुशबुदार परम्पराओं को लेकर मौल्यार ऐग्ये नामक संस्था यूँ तो पूरे देहरादून में उत्तराखंडी होली का जनजागरण कर रहा है लेकिन आज होली के अंतिम दिन इस टीम के साथ लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, सुप्रसिद्ध जागर गायक प्रीतम भरतवाण सुप्रसिद्ध गायिका संगीता ढौंडियाल, वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र जोशी, पत्रकार व संस्कृति/रंगकर्मी मनोज इष्टवाल, ईटीवी पत्रकार रोबिन चौहान सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।

उत्तराखंड के सुनाम धन्य लोकगायक घंटाघर पर होली गायन करते हुए !

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के आवास के बाद यह टीम जहाँ डॉ. जयंत नवानी, आई जी गढ़वाल संजय गुंज्याल के आवास व राजेन्द्र जोशी के आवास में होली मनाने पहुंची, वहीँ अपनी धरोहर में व्याप्त रंगों को लेकर ये रंगकर्मी उत्तराखंड राजधानी की धड़कन घंटाघर में होली खेलते नजर आये जिसकी अगुआई लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी व जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण करते दिखाई दिए। आज कुमाऊं के गिरीश तिवारी गिर्दा और चारुचंद पांडे “गौर्दा” सचमुच तब बहुत याद आये जब नरेंद्र सिंह नेगी व प्रीतम भरतवाण ने इस तरह से पहाड़ी होली का यशोगान राजधानी क्षेत्र में किया. शायद कहीं न कहीं इन लोगों के अंदर की वह पीड़ा निकल कर बाहर आई जो उनके गॉव खलिहान खेतों की मुंडेरों पर बहुराए फूलों की खुश्बू की थी जिसका आमन्त्रण हर वह गॉव देता हैं जहाँ हम पीला बढे और पलायन कर गए।
लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जिस उत्साह और जोश के साथ मौल्यार टीम का नेतृत्व करते दिखाई दिए उस से उनके चेहरे पर उभरे भाव भंगिमा साफ़ जता रही थी कि हमारा वह जनमानस लोक सरोकार और लोक संस्कृति आज भी हमारे साथ है उसका जनजागरण करने की पहल हमें ही करनी होगी वरना हम तो रहेंगे हमारा लोक कहीं नहीं बचेगा। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण की पीड़ा कुछ उनसे जुदा थी उनका कहना था कि काश…हमारे टिहरी में भी होली की लोक विधा पूर्व से इसी तरह धनवान होती जैसे ब्रिटिश गढ़वाल की रही है।
वहीँ गायिका संगीता ढौंडियाल के चेहरे की ख़ुशी देखते ही बनती थी शायद उनकी सोच में यह विकल्प कब से हिलोरे मार रहा था वह चाहती थी कि ऐसा कोई दिन तो मुकर्रर हो जब रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी उत्तराखंड की आवोहवा की खुशबु इस तरह भरे बाजार में लायें ताकि हमारा वजूद हमें और मजबूत बनाए। आईजी संजय गुंज्याल के हौसले को सलूट कि उन्होंने मौल्यार ऐग्ये टीम को घंटाघर की परिक्रमा की इजाजत दे दी, लेकिन मौल्यार ऐग्ये टीम ने बेहद अनुशासित ढंग से शहर के ट्राफिक को बिना बाधा पहुंचाए अपनी लोक संस्कृति का परचम लहराया।
आईजी गढ़वाल ने अपने आवास पर पहुंचे मौल्यार ऐग्ये की टीम का शुक्रिया अदा करते हुए बेहद ख़ुशी जताई उन्हें ख़ुशी इस बात की थी कि जिस माटी में हम जन्मे वहां की सौंधी सुगंध धरा में रंगों के साथ उड़ रही थी वे अपने जनजातीय क्षेत्र की टीम के ऊँ होली गीतों से भी बेहद मन्त्रमुग्ध थे जो वहां की टीम लेकर आई थी. शायद इसी को खुद बिसराना कहते हैं।

मोल्यार यानी बसंत के आगमन की ख़ुशी में राजधानी

वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल बेहद खुश नजर आये लेकिन इस बात कि कशिश उनके मन में ही रह गयी कि वे इस टीम को अपने आवास तक नहीं ले जा पाए. उन्होंने कहा हमारी लोक संस्कृति में जो होली का अनुशासन है काश…हम सब वह बानगी हर होली में पेश करते तब न कोई हादसा होता न बैरमनस्य। वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र जोशी के घर में तो इस टीम का ऐसा इन्तजार हो रहा था मानो बारात आने वाली हो उनकी धर्मपत्नी बेटी बेटे व पोती दोपहर से ही आँखें बिछाए इस टीम के स्वागत का इन्तजार कर रहे थे। उनकी धर्मपत्नी के शब्द थे. पिछली होली में मौल्यार के होल्यार जो आशीष मेरे घर परिवार को दे गए वह मेरे परिवार के लिए फलीभूत हुए मैं हर उस घर की खुशहाली की कामना करती हूँ जहां जहां भी मेरे पहाड़ से आई यह बयार बही।

 

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