बदल मुकद्दर आगे बढ़कर 

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बदल मुकद्दर आगे बढ़कर
नहीं डूबेगी तेरी नैया
जल भी तेरा, ताल भी तेरा
तू ही नदी औऱ तू ही समंदर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

आशाओं के दीप जला दो
मुश्किलों के पहाड़ गला दो
धरती तेरी, माटी तेरी
तू ही धरा और तू ही अंबर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

बदलाव का बिगुल बजा दो
चेहरों पर मुस्कान सजा दो
अस्त्र भी तेरे, शस्त्र भी तेरे
तू ही ढाल और तू ही खंजर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

आंखों से तुम नमीं हटा लो
क्रूर काल का वार घटा दो
जल भी तेरा, थल भी तेरा
तू ही किनारा, तू ही भंवर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

संकट में तुम मत घबराना
कांटों को तुम पुष्प बनाना
धूप भी तेरी, छांव भी तेरी
तू ही अंधेरा , तू ही रोशनी
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

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