सामाजिक और आर्थिक विकास से है साक्षरता का नाता

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अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर पर विशेष

साक्षरता का अर्थ है पढऩे लिखने की योग्यता। दूसरे संसाधनों की तरह साक्षरता भी आज हमारे जीवन की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक मानी जाती है। साक्षरता सिर्फ हमारे खुद के विकास तक सीमित नहीं है इसका गहरा सम्बन्ध सामाजिक और आर्थिक विकास से भी है। साक्षरता का महत्व है इसी बात से समझा सकता है कि जिस प्रकार इंसान को जीने के लिए प्राण वायु की आवश्यकता है उसी प्रकार जीवन यापन के लिए शिक्षित होना बहुत जरूरी है।

सोचिये,यदि आप शिक्षित नहीं है तो आपको यह एहसास हो जायेगा कि ”आप कितने ऐसे काम है जो नहीं कर पाएंगे।” घर के छोटे मोटे काम करने से लेकर कही बाहर जाने तक हमारा शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। जीवन यापन के साथ साथ स्वयं के बौद्धिक विकास के लिए भी पूर्ण रूप से शिक्षित होना जरूरी है। आज भी कई लोग ऐसे है जो खुद अशिक्षित होते हुए भी अपने बच्चों को भी शिक्षित नहीं कर रहे हैं।

जरा सोचिये,भविष्य में उनको जीवन यापन करने में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। सरकार द्वारा मुफ़्त मुफ्त में शिक्षा देने जैसी योजनाएं चलाए जाने के बावजूद न जाने क्यों ये लोग बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।शिक्षित समाज से सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण होता है। आज अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के सुअवसर पर लोगों को जागरूक करने की नितांत आवश्यकता महसूस की जा रही है।

राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, वरिष्ठ शिक्षक

आज भी भारत में पुरुषों के मुकाबले महिला साक्षरता दर काफी कम है जो राष्ट्र के लिए एक दुखद और विचारणीय विषय है । आज विश्व में जहाँ महिलाऐं हर वह काम करने में सक्षम हैं जो पुरुष कर सकते हैं ।इसके बावजूद हमारे यहाँ महिला साक्षरता दर काफी कम है और इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि कई माता-पिता लड़कियों को स्कूल भेजने की अनुमति नहीं देते और उन्हें घर बैठा लेते हैं। बदलते हुए परिवेश में यह सोच बदलने की जरुरत है ताकि महिलाऐं भी शिक्षित बनें और समाज और देश का विकास हो ।

 

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