देहरादून से विदेश तक फैले किडनी के धंधे की पूरी कहानी

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देहरादून। टूटी फूटी हिन्दी बोलने वाली 32 साल की बांग्लाभाषी महिला बताती हैं कि उनकी 11 साल की बेटी की तबीयत खराब चल रही है। उनके पास बेटी के इलाज के लिए पैसा नहीं था। उनको किडनी बेचने से जो पैसा मिलता, उससे बेटी का इलाज कराती। उसकी बेटी की ओर देखो साहब।

अगर इस पीड़ित की बात सही है तो इससे बड़ा तमाचा उस सिस्टम के लिए कुछ नहीं हो सकता, जो लगातार बेटियों को आगे बढ़ाने और सबके लिए बेहतर स्वास्थ्य का दावा करता है। इस महिला जैसे लोग उन धंधेबाजों के निशाने पर हैं, जो पैसों की खातिर किसी की जान भी लेने से नहीं चूकते।

गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल में किडनी निकलवाने के बाद इस महिला को हरिद्वार के रास्ते दिल्ली शिफ्ट किया जा रहा था। हरिद्वार में सप्तऋषि चौक के पास पुलिस ने उस इनोवा कार को पकड़ लिया, जिसमें उसके साथ पश्चिम बंगाल की एक अन्य महिला, गुजरात के दो व्यक्ति भी सवार थे।

किडनी निकालने वाले इस गिरोह ने उन लोगों को अपने निशाने पर लिया हुआ था, जो मजबूर हैं और उनको इलाज या अन्य किसी वजह से पैसों की काफी जरूरत है। इस गिरोह के एजेंट इन लोगों को नौकरी का झांसा दिलाकर, किडनी के लाखों रुपये दिलाने के नाम फंसाकर देहरादून के लालतप्पड़ स्थित गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल तक ला रहे थे। पुलिस ने लगभग चार माह से चल रहे इस गिरोह का खुलासा करके मुंबई में सक्रिय एक एजेंट जावेद खान को गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि लालतप्पड स्थित उत्तरांचल डेंटल कालेज लालतप्पड़ के परिसर में स्थित गंगोत्री चैरिटेबल हॉस्पिटल में किडनी निकालने के शर्मनाक धंधे की सूचना हरिद्वार के एक अस्पताल से पुलिस के अफसरों तक पहुंची। पुलिस सूत्रों ने खुलासा किया कि किडनी निकालने के बाद पीड़ितों को गंगोत्री अस्पताल से सीधे दिल्ली या दूसरे शहरों में शिफ्ट किया जा रहा था।

सड़क मार्ग से इनको भेजा जा रहा था। यह काम इतनी सफाई से किया जा रहा था कि किसी को भनक भी नहीं लग रही थी कि इस अस्पताल में किडनी निकालने और बेचने का धंधा किया जा रहा है। हुआ यह कि एक पीड़ित को दिल्ली की ओर भेजा रहा था कि रास्ते में उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसको हरिद्वार के किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस अस्पताल से यह सूचना लीक हुई और सिपाही पंकज सिंह को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने पुलिस अफसरों को सूचना दी और फिर पुलिस ने गंगोत्री अस्पताल को अपने राडार पर ले लिया। सभी तरह की सूचनाओं को इकट्ठा करने के बाद पुलिस ने रविवार रात हरिद्वार सप्तऋषि चौकी पर इनोवा कार की तलाशी लेकर उसमें सवार दो महिलाओं सहित पांच लोगों को हिरासत में ले लिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने मीडिया को बताया कि सप्तऋषि चौकी पर तलाशी के दौरान आरोपी जावेद खान पुत्र सरवर खान निवासी ग्रीन पार्क सोसायटी एसजी स्कूल, एसबी रोड, शांताक्रूज, मुंबई को गिरफ्तार कर लिया गया। इस शर्मनाक धंधे में शामिल हॉस्पिटल के केयर टेकर राजीव चौधरी, डॉ. अमित रावत सहित चार लोग फरार बताए जाते हैं।

चार महीने में 25 से 30 किडनी निकालींःपुलिस ने जब गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल के भीतर का नजारा देखा तो वहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सभी जरूरी साजोसामान जुटा हुआ मिला। पुलिस अधिकारी ही खुलासा करते हैं कि यहां लगभग चार महीने से किडनी की खरीद फरोख्त का धंधा चल रहा था। कम से कम 25 से 30 लोगों की किडनी तो बेची जा चुकी होगी। पुलिस ने सरकारी डॉक्टरों से भी इस सामान को चेक कराया। इन डॉक्टरों ने वहां मौजूद मशीनों से मिली डिटेल के आधार पर यह खुलासा किया।
खाड़ी देशों से पहुंच रहे किडनी लगवाने वालेः पुलिस को यह जानकारी मिली कि इस अस्पताल में कुछ दिन पहले सऊदी अरब के कुछ लोगों को देखा गया था। शायद ये लोग किडनी लगवाने के लिए किसी मरीज को लाए होंगे। ये लोग भी वाया रोड दिल्ली की ओर रवाना हुए थे।
कैसे टूटेगा यह नेटवर्कः किडनी की खरीद फरोख्त करने वाला गिरोह पूरे देश में फैला है। ये लोग उन गरीब और जरूरतमंदों को अपने निशाने पर लेते हैं, जो पैसों की खातिर इनके झांसे में फंस जाते हैं। पश्चिम बंगाल और गुजरात के दो लोगों का खुलासा तो हो गया, लेकिन अभी पुलिस के सामने उन लोगों का पता लगाना भी चुनौती बना है, जिनको इन लोगों ने शिकार बनाया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस गिरोह के एजेंट देशभर में फैले हैं, लेकिन ये एजेंट एक दूसरे को नहीं जानते। एजेंट जावेद खान से पूछताछ के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है। इसके लिए सबसे पहले राजीव चौधरी और डॉ. अमित रावत की गिरफ्तारी किया जाना जरूरी है। ये ही लोग पुलिस को पूरे नेटवर्क के सिरों तक पहुंचाएंगे।

अब तक इस मामले को खुलासा करने वाली पुलिस टीम में पुलिस अधीक्षक देहात सरिता डोबाल, कोतवाल ओमवीर सिंह रावत, हरिद्वार के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह बिष्ट, एसआई मंजुल रावत, सुरेश बलोनी, दिनेश सती, राकेश पंवार, आदित्य सैनी, कांस्टेबल गब्बर सिंह, भूपेंद्र सिंह, विनोद चौधरी, नीरज कुमार, राजीव, भूपेंद्र शामिल हैं।

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