धागों से बुनती आजीविका की डोर: मैक्रमे हस्तशिल्प

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देहरादून में हस्ताक्षर फाउंडेशन ट्रस्ट ने दिया प्रशिक्षण

  •  जेपी मैठाणी

देहरादून। इंदिरानगर गलज्वाड़ी में आजकल मैक्रमे कला आधारित वाॅल हैंगिंग्स, फ्लावर पाॅट हैंगिंग्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहे शारदा विमला देवी हस्ताक्षर फाउण्डेशन ट्रस्ट की ट्रस्टी श्रीमती वैशाली थापा ने बताया कि महानगरों में प्राकृतिक रेशों जैसे कपास, जूट, सन से बने हस्तशिल्प उत्पादों की बहुत मांग है।

जेपी मैठाणी

इसी वजह से उन्होंने देहरादून के गढ़ी कैन्ट के निकट के ग्रामीण महिलाओं को यह प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया। महिलाओं द्वारा जागृति नारी स्वयं सहायता समूह की स्थापना की गई और अब उन्हें धागों, सेरेमिक, कांच, प्लास्टिक, लकड़ी की बीड्स से नये-नये उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्रशिक्षक संजीव द्वारा दिये जा रहे है। प्रशिक्षण में शामिल समूह की अध्यक्ष श्रीमती चंदा शाही ने बताया कि ये नया काम सीख कर हमें बहुत खुशी हो रही है इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की वजह से हम सब संगठित होकर काम करेंगे और अपना रोजगार बढ़ायेंगे।

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हस्ताक्षर ट्रस्ट देहरादून, दिल्ली अन्य महानगरों में ट्रेड फेयर और प्रदर्शनी के माध्यम से बाजार उपलब्ध करायेगा साथ ही यात्रा सीज़न में महिलाओं द्वारा हस्तशिल्प उत्पाद यात्रा रूट पर भी विपणन केन्द्रों में रखे जायेंगे। प्रशिक्षण में श्रीमती चंदा शाही, समूह उपाध्यक्षी मीना, सचिव दीपा शाही, कोषाध्यक्ष शीतल सहित 15 महिलाएं शामिल हो रही हैं।कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किये जायेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कुछ महिलायें पास की नदी में हाड़ तोड़ मेहनत कर बजरी पत्थर इकट्टा कर बामुश्किल प्रतिदिन 200 रुपये तक कमाती थीं। लेकिन आ मेक्रमे हस्तशिल्प उत्पाद जिनके बनाने में किसी भी प्रकार कोई रिस्क नहीं है से प्रतिदिन 300 रुपये से 400 रुपये तक कमा सकती हैं।

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