उत्तराखंडः मां गंगा के जीवित होने का विरोध कर रही सरकार !

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  • ‘मां गंगा’ को हाईकोर्ट ने दिया है ‘जीवित’ का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी सरकार
  • नमामि गंगे योजना पर खर्च किए जा रहे अरबों
  • केंद्र की मोदी सरकार पहले ही दे चुकी है चुनौती
  • दर्जा बरकरार रहने पर बढ़ेंगी अफसरों की मुश्किलें

देहरादून


गंगा को पुरातन समय से ही ‘मां’ का दर्जा दिया जाता रहा है। गंगा के महत्व को देखते हुए ही नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा को ‘जीवित’ का दर्जा दिया है। इसका जीवन बचाने के नाम पर केंद्र सरकार एक तरफ तो अरबों रुपये खर्च कर रही है तो दूसरी ओर गंगा को फिर से ‘मारने’ के इरादे से सुप्रीम कोर्ट में ‘जीवित’ घोषित करने के आदेश को चुनौती दी है। अब सूबे की सरकार भी इसी राह पर चलकर हाईकोर्ट का आदेश रद्द कराने की तैयारी में है।

कुछ माह पहले हाईकोर्ट ने गंगा और यमुना को ‘जीवित’ का दर्जा दिया है। साथ ही नमामि गंगे प्रोजेक्ट के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के महाधिवक्ता को इसका ‘अभिभावक’ घोषित किया है। इस फैसले से साफ है कि गंगा से छेड़छाड़ करने पर इन तीनों को ऐसा करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का अधिकार है और गंगा की रक्षा न होने की दशा में इन तीनों के खिलाफ भी एफआईआर कराई जा सकती है। इससे अफसरशाही में हड़कंप मचा हुआ है।

केंद्र सरकार भले की गंगा को जीवित रखने के नाम पर नमामि गंगे समेत कई प्रोजेक्ट पर अरबों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन गंगा को ‘जीवित’ का दर्ज उसे रास नहीं आया। नतीजा यह रहा कि मोदी सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। इस मामले में राज्य सरकार के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता भी किसी वक्त भी गंगा के उत्पीड़न मामले में कानून के शिकंजे में फंस सकते हैं। लिहाजा, राज्य सरकार भी ‘गंगा मां’ को मारने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में है। इस बारे में राज्य कैबिनेट अपनी हरी झंडी दे चुकी है।

अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि हर बात में ‘मां गंगा’ की दुहाई देने वाली भाजपा की सरकारें जीवित घोषित हो चुकी मां को मारने की तैयारी में क्यों हैं। हाईकोर्ट ने यह दर्जा देकर मां गंगा की महत्ता को और भी बढ़ा दिया है। अब एक बार से गंगा और यमुना के दोहन की दिशा में आगे क्यों बढ़ा जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गंगा में गंदगी डालने से लोग घबराने लगे थे। अगर मां को फिर मार दिया जाएगा तो इसे बचाने के नाम कर अऱबों खर्च करने का क्या फायदा।

‘मां गंगा’ को बचाएगा मातृसदन

गंगा को बचाने की मुहिम में लगे हरिद्वार मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज राज्य सरकार के इस फैसले से खासे आहत हैं। शिवानंद ने बातचीत में कहा कि सरकार के इस फैसले का मातृ सदन पुरजोर विरोध करेगा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से पहले ही मातृ सदन की ओर से कैवियट दाखिल की जाएगी। ताकि कोई फैसला लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट उनका पक्ष भी सुन सके।

 

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